Fundamental Rights | मौलिक अधिकार

Fundamental Rights Static GK – मौलिक अधिकार ! भारत के संविधान के भाग 3 में 6 मौलिक अधिकार के बारे में बताया गया है ! इस पोस्ट में मौलिक अधिकार से संबंधित 12 से 35 तक अनुच्छेद के बारे में जानकारी दी गई है ! आप एक बार इन सभी मौलिक अधिकार एवं संबंधित अनुच्छेद को अवश्य देखें !


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भारतीय संविधान की 12 अनुसूचियाँ

Fundamental Rights | मौलिक अधिकार

# संविधान के भाग 3 में अनुच्छेद 12 से 35 तक मौलिक अधिकारों के बारे में बताया गया है !
# संविधान के भाग 3 को ‘भारत का मैग्नाकार्टा‘ कहा जाता है

मैग्नाकार्टा क्या है

# मैग्नाकार्टा दुनिया का एक प्रसिद्ध (घोषणा पत्र या अधिकार पत्र) दस्तावेज है !
# इस घोषणा पत्र को सर्वप्रथम इंग्लैंड के किंग जॉन ने राजनैतिक संकटों का सामना करते समय व्यवहारिक समाधान के तौर पर 1215 में जारी किया था !
# मैग्नाकार्टा अधिकार पत्र के सिद्धांत के अनुसार ही तय हुआ की सभी कानून के दायरे में हैं !

अनुच्छेद 12 – परिभाषा
अनुच्छेद 13 – मूल अधिकारों से असंगत या उनका अल्पीकरण करने वाली विधियाँ

भारतीय संविधान के 22 भाग

# भारत का संविधान मुख्य रूप से 6 मौलिक अधिकार प्रदान करता है –

1. समता का अधिकार (अनुच्छेद 14 – 18 तक)

अनुच्छेद 14 – विधि के समक्ष समता

# इसके अंतर्गत किसी व्यक्ति को विधि के समक्ष समता से या विधियों के समान संरक्षण से वंचित नहीं करेगा !

अनुच्छेद 15 – धर्म, जाति, लिंग या जन्म स्थान के आधार पर विभेद का प्रतिषेध

# इसके अंतर्गत राज्य, किसी नागरिक के विरुद्ध केवल धर्म, मूलवंश, जाति, लिंग जन्मस्थान या इनमें से किसी के आधार पर कोई विभेद नहीं करेगा !

अनुच्छेद 16 – लोक नियोजन के विषय में अवसर की समता

# इसके अंतर्गत राज्य के अधीन किसी पद पर नियोजन या नियुक्ति से संबंधित विषयों में सभी नागरिकों के लिए समान अवसर होगा !
# जाति, धर्म, लिंग के आधार पर कोई भी व्यक्ति न तो अपात्र होगा ना ही उससे कोई विभेद किया जाएगा !

अनुच्छेद 17 – अस्पृश्यता का अंत

# इसके अंतर्गत अस्पृश्यता को समाप्त करने की व्यवस्था अर्थात जाती, लिंग, धर्म के आधार पर किसी भी व्यक्ति के प्रति छुआछूत या हीन भावना रखना दंडनीय अपराध माना गया है !

अनुच्छेद 18 – उपाधियों का अंत

# राज्य, सेना या विद्या संबंधी सम्मान के अलावा और कोई उपाधि प्रदान नहीं करेगा !
# भारत का कोई भी नागरिक किसी विदेशी राज्य से कोई उपाधि स्वीकार नहीं करेगा !

2. स्वतंत्रता का अधिकार (अनुच्छेद 19 – 22 तक)

अनुच्छेद 19 – बोलने एवं अन्य विषयों से संबंधित अधिकारों का संरक्षण

19 (क) – भाषण एवं अभिव्यक्ति का अधिकार
19 (ख) – शांतिपूर्ण ढंग से जमा होने एवं सम्मेलन करने का अधिकार
19 (ग) – संगठित होने का अधिकार
19 (घ) – भारत में कहीं भी आने जाने का अधिकार
19 (ड़) – भारत के किसी भी हिस्से में रहने या बसने का अधिकार
19 (च) – संपत्ति का अधिकार (44 वें संविधान संशोधन अधिनियम द्वारा हटाया गया) अनुच्छेद 300 (क) में इसको रखा गया है !
19 (छ ) – कोई भी पेशा चुनने एवं व्यापार करने का अधिकार

अनुच्छेद 20 – अपराधों के लिए दोषसिद्धि के संबंध में संरक्षण

# किसी भी व्यक्ति को अपराध के लिए तब तक दोषी नहीं ठहराया जाएगा, जब तक कि ऐसा कोई कार्य करते समय (जो व्यक्ति अपराध के रूप में आरोपित है) किसी प्रवृत्त विधि का अतिक्रमण नहीं किया है !
# किसी व्यक्ति को एक ही अपराध के लिए एक से अधिक बार दंडित नहीं किया जाएगा !
# किसी व्यक्ति को अपराध के लिए स्वयं अपने विरुद्ध गवाही के लिए बाध्य नहीं किया जाएगा !

अनुच्छेद 21 – प्राण एवं दैहिक स्वतंत्रता का संरक्षण

# किसी व्यक्ति को उसके प्राण दैहिक स्वतंत्रता से विधि द्वारा स्थापित प्रक्रिया के अनुसार ही वंचित किया जाएगा अन्यथा नहीं !

अनुच्छेद 21 (क) – शिक्षा का अधिकार

# इसके अंतर्गत राज्य, 6 से 14 वर्ष की आयु के सभी बच्चों को निशुल्क एवं अनिवार्य शिक्षा उपलब्ध करवाएगा !
# 86 वें संविधान संशोधन अधिनियम 2002 के तहत यह प्रावधान किया गया था !

अनुच्छेद 22 – कुछ दशाओं में गिरफ़्तारी और निरोध से संरक्षण

# किसी व्यक्ति को जो गिरफ्तार किया गया है, ऐसी गिरफ्तारी के कारणों से यथाशीघ्र अवगत कराए बिना अभिरक्षा में निरुद्ध नहीं रखा जाएगा !
# जिस व्यक्ति को गिरफ्तार किया गया है, गिरफ्तारी के समय से लेकर 24 घंटे भीतर निकटतम मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश किया जाएगा !

3. शोषण के विरुद्ध अधिकार (अनुच्छेद 23 – 24 तक)

अनुच्छेद 23 – मानव के दुर् व्यापार और बलातश्रम का प्रतिषेध

# मानव का दुर् व्यापार और बेगार तथा इसी प्रकार का अन्य बलात श्रम इसके अंतर्गत प्रतिबंधित किया गया है !
# सार्वजनिक कार्यों या प्रयोजन के लिए राज्य अनिवार्य श्रम लागू कर सकता है !

अनुच्छेद 24 – कारखानों आदि में बालकों के नियोजन का प्रतिषेध

# 14 वर्ष से कम आयु के किसी बालक को किसी कारखाने या किसी खान में काम करने के लिए बाध्य नहीं किया जाएगा
# किसी अन्य परिसंकट के समय में भी बालक को काम में नहीं लिया जाएगा !

4. धर्म की स्वतंत्रता का अधिकार (अनुच्छेद 25 – 28 तक)

अनुच्छेद 25 – अंत: करण की और धर्म के अबाध रूप से मानने, आचरण और प्रचार करने की स्वतंत्रता

# सभी व्यक्तियों को अंत: करण की स्वतंत्रता का और धर्म के अबाध रूप से मानने, आचरण करने और प्रचार करने का समान हक होगा !
# कृपाण धारण करना और लेकर चलना सिक्ख धर्म के मानने का अंग समझा जाएगा !

अनुच्छेद 26 – धार्मिक कार्यों के प्रबंध की स्वतंत्रता

अनुच्छेद 27 – किसी विशिष्ट धर्म की अभिवृद्धि के लिए करों के संदाय के बारे में स्वतंत्रता

अनुच्छेद 28 – कुछ शिक्षण संस्थाओं में धार्मिक शिक्षा या धार्मिक उपासना में उपस्थित होने के बारे में स्वतंत्रता

5. संस्कृति और शिक्षा संबंधी अधिकार (अनुच्छेद 29 – 30 तक)

अनुच्छेद 29 – अल्पसंख्यक वर्गों के हितों का संरक्षण

# भारत के किसी भी भाग के निवासी नागरिकों के किसी अनुभाग को, जिसकी अपनी विशेष भाषा, लिपि या संस्कृति है, उसे बनाए रखने का अधिकार होगा !
# राज्य द्वारा पोषित किसी शिक्षा संस्था में प्रवेश से किसी भी नागरिक को जाति, लिंग, भाषा के आधार पर वंचित नहीं किया जाएगा !

अनुच्छेद 30 – शिक्षा संस्थाओं की स्थापना और प्रशासन करने का अल्पसंख्यक वर्गों का अधिकार

# धर्म या भाषा पर आधारित सभी अल्पसंख्यक वर्गों को अपनी रुचि की शिक्षा संस्थाओं की स्थापना और प्रशासन का अधिकार होगा !

अनुच्छेद 31 – संपत्ति का अनिवार्य अर्जन

44 वां संविधान संशोधन अधिनियम 1978 द्वारा हटाया गया !

6. संवैधानिक उपचारों का अधिकार (अनुच्छेद 32 – 35 तक)

अनुच्छेद 32 – पाँच रिटों का उपयोग करके मौलिक अधिकारों के प्रवर्तन के लिए उपचार का अधिकार

1. बंदी प्रत्यक्षीकरण – गैर कानूनी रूप से हिरासत में लिए गए वेकती की रिहाई का निर्देश देना !
2. परमादेश – एक सार्वजनिक प्राधिकरण को अपना कर्तव्य करने के लिए निर्देशित करना !
3. प्रतिषेध – किसी मामले पर निचली अदालत को आगे बढ़ने से रोकना !
4. अधिकार पृच्छा – किसी व्यक्ति को गलत तरीके से ग्रहण किए गए कार्यालय को खाली करने का निर्देश देना
5. उत्प्रेषण लेख – निचली अदालत से किसी कार्यवाही को हटाने और उसे अपने सामने लाने की उच्च न्यायालय की शक्ति

अनुच्छेद 33 – संसद को सशस्त्र बलों, अर्द्ध सैनिक बलों, पुलिस बलों और समान बलों के सदस्यों के मौलिक अधिकारों को प्रतिबंधित या निरस्त करने का अधिकार देता है !

अनुच्छेद 34 – मार्शल लॉ (सैन्य शासन) के लागू होने पर मौलिक अधिकारों पर प्रतिबंध का प्रावधान करता है !

अनुच्छेद 35 – मौलिक अधिकारों पर कानून बनाने के लिए संसद को अधिकार प्रदान करता है !


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